ख्वाब देखे जो जागती आँखें हर पल,
उनपे क्योंकर एक महल भी बनाया जाए
देर तलक मैं भी रुका वो न आये लेकिन
होगी मजबूरी, बहाना क्यों ये बनाया जाए
इक तड़प सी उठी दिल के किस कोने में
मैं तो जानू हूँ, तुम्हे क्योंकर बताया जाए
लोग हँसते हैं इस हालाते जुदाई पर
साथ हंस उनके, क्यों न कुछ दर्द बढाया जाए
एक कशिश थी उन पर्दा नशीं आँखों में
राज़ से क्योंकर पर्दा उठाया जाए
इंतज़ार ए शब् में बिताई शाम कैसे
इसका एहसास कभी और कराया जाए
लफ्ज़ गर कम भी पड़े, आंसूओं ने दिया साथ मेरा
उनका एहसान अब कैसे उतारा जाए
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